Thursday, July 18, 2019

दुनिया में सबसे पहले कोन आया !! मनु?


           # दुनिया में सबसे पहले कोन आया?





           
  *   नमस्कार दोस्तों क्या आप जानते हैं कि दुनिया में सबसे पहले कों आया?
 * दुनिया में उत्पन्न होने वाला पहला प्राणी कोन था 
अगर ये आप जानना चाहते हैं तो मेरा ब्लॉग पूरा पढ़े सायाद मै आपको कुछ समझा सकूं।।

# विज्ञान की दृष्टि से :-

*  दुनिया में विज्ञान कितनी भी तरक्की कर ले लेकिन अभी तक यह पता नहीं चल पाया कि इस संसार को किसने बनाया है। विज्ञान के अनुसार जीवों की उत्पत्ति पार्टिकल्स  हुई होगी ! लेकिन मनुष्य कैसे आया और किस तरह इस दुनिया की धीरे-धीरे रचना हुई है यह सवाल हमेशा हमारे मन में आता है। इसका उत्तर हमें कई धार्मिक पुस्तकें और विज्ञान द्वारा खोजे गए तथ्य देते तो जरूर हैं लेकिन आखिर सच्चाई क्या है, यह जानना बहुत जरूरी है।
*। 

लेकिन इस सब से ऊपर एक और सवाल यह भी है कि आखिरकार पहला मनुष्य कौन था। वो कहां से आया और उसे बनाने वाला यानी कि उसका रचियता कौन था। उसका इस संसार में आना और किस समय पर आना यह सभी कुछ ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब हर मनुष्य जानना चाहता है, क्योंकि हमारा आधार केवल वही एक मनुष्य है जिसकी बदौलत इस विशाल जाति का जन्म हुआ।
        
* ।हिन्दू धर्म के अनुसार :- 
संसार का पहला मानव स्वयंभुव मनु को माना जाता है, जबकि स्त्री थीं शतरूपा.
कहा जाता है कि भगवान ब्रह्मा ने जब 11 प्रजातियों और 11 रुद्रों की रचना की, तब अंत में उन्होंने स्वयं को दो भागों में विभक्त कर लिया. पहला भाग मनु के रूप में और दूसरा शतरूपा के रूप में प्रकट हुआ.  कहते हैं कि ब्रह्मा ने प्रजापतियों को प्रकाश से, रुद्रों को अग्नि से और स्वायंभुव मनु को मिट्टी से बनाया था.
                                   संसार में आने वाला सबसे पहला मानव मनु था. इसलिए इस जाति का नाम ‘मानव’ पड़ गया. संस्कृत में इसे मनुष्य कहा जाने लगा और अंग्रेजी भाषा में भी मिलते-जुलते नाम ‘मैन’ का प्रयोग हुआ.
यह सभी नाम पहले मनुष्य मनु से ही जुड़े है।।
पुराणों के मुताबिक एक बार ब्रह्मा जी अपने कुछ कार्यों में व्यस्त थे. अचानक उनके भीतर से एक काया उत्पन्न हुई और उनके सामने आकर खड़ी हो गई. वह कोई मामूली काया नहीं थी बल्कि हूबहू उनके जैसी दिखनेवाली परछाईं थी.    
कथाओं के अनुसार:-
* उस परछाईं को देख कुछ देर तक तो भगवान ब्रह्मा समझ ना सके कि उनके साथ आखिरकार हुआ क्या है. आगे जाकर यही मानव संसार का पहला मानव कहलाया. जिसे स्वयंभु मनु के नाम से भी जाना जाता है.

बाईबल के अनुसार:-



   जैसे हिंदु मान्यता के मुताबिक भगवान ब्रह्मा के शरीर से मनु की उत्पत्ति हुई, ठीक वैसे ही बाइबल में भी ईश्वर के शरीर से एक परछाईं ने जन्म लिया था. यह परछाईं मनु की तरह ही ईश्वर की छाया थी और उन्ही की तरह दिखती थी. बाइबल में इस परछाई यानी कि पहले मनुष्य को ‘एडेम’ का नाम दिया गया.
इन दोनों कथाओं से यह पता चलता है कि मनु ही वह पहला मानव था जिसने मनुष्य के रूप में धरती पर जन्म लिया.

दोनों में समानता :-

पुराण के अनुसार मनु तथा शतरूपा के जन्म के बाद भगवान ब्रह्मा द्वारा उन्हें धरती पर मानवीय संसार को स्थापित करने का आदेश दिया गया था.
ठीक उसी तरह एडेम के जन्म के बाद धरती पर मानवीय संसार को स्थापित करने की कहानी का ज़िक्र बाइबल में  मिलता है.
बहरहाल धरती के पहले मनुष्य मनु के जन्म से लेकर उसके विस्तार तक की कई अलग-अलग कहानियां सुनने को मिलती है, जो रोचक होने के साथ ही हैरत में डालने वाली हैं.

                 

Wednesday, July 17, 2019

हनुमान चालीसा का हिंदी में पूर्ण अनुवाद !



                   हनुमान चालिसा का हिंदी अनुवाद :-
  


         नमस्कार दोस्तो आज मै आप सभी के लिए हनुमान चालीसा का हिंदी अनुवाद लेकर आया हूं 

ताकि आप सभी हनुमान चालीसा को सरल भाषा में सहजता से अध्ययन कर सकें-:

* हनुमान चालीसा श्री तुलसीतुद्वारा  रचित है
कहा जाता है कि हनुमान चालिसा में अपार शक्ति निहित है जो कि कोई सत बार, अर्थात् सौ बार सच्चे मन से जपे तो उसे सिद्ध कर सकता  है ।
* कहा जाता हैं कि  हनुमान जी को माता सीता द्वारा अजर अमर का वरदान प्राप्त है और वे आज भी हमारे बीच उपस्थित है ।
* हनुमान जी एक परम राम भक्त है अतः जो भी श्रीराम जी की भक्ति करता है वो हनुमान जी के आशीस का भागी है
  
आइए हम  श्री हनुमान चालीसा का पाठ करें  !!



            

                           // जय श्रीराम  //



श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।


अर्थ - श्री तुलसीदास जी कहते हैं कि अपने गुरु के चरणों की धूल को स्पर्श करके मन, आत्मा और बुद्धि को पवित्र करते हुए श्री रघुवीर के निर्मल यश का गुणगान करता हूं, जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को वितरित करते हैं।

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।


अर्थ - हे पवनपुत्र हनुमानजी  मैं आपसे विनती करता हूं कि मुझ जैसे निर्बल और बुद्धिहीन को ऊर्जा  और ज्ञान देकर, मेरे क्लेश और दुखों को दूर कीजिए।

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।


अर्थ - हे पवनपुत्र हनुमान! आपके ज्ञान और गुण पृथ्वी पर सागर की तरह विशाल है, जिनका कोई अंत नहीं है। इस ब्रह्मांड के तीनो लोक आकाश लोक, भूलोक और पाताल लोक में आपकी यश और कीर्ति की चर्चा है।

रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।


अर्थ - हे रामदूत।। अंजनी-पुत्र, पवनसुत ये सब आपके ही नाम है और इस ब्रम्हांड में आपकी समान कोई भी बलवान नहीं है।

महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।






अर्थ - हे पवनपुत्र महावीर बजरंगी! आप दुनिया के सबसे बड़े पराक्रमी हैं, आप बुद्धिहीन व्यक्ति को बुद्धि प्रदान करते हैं और अच्छी बुद्धि का साथ देते हैं।

कंचन बरन बिराज सुबेसा।कानन कुंडल कुंचित केसा।।
अर्थ - हे बजरंगबली! आप सुनहरी रंग और सुंदर वस्त्रों से सजे हुए हैं, और आपके कानों में कुंडल और आपके बाल घुंघराले हैं।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
कांधे मूंज जनेऊ साजै।।


अर्थ - हे बजरंगबली! आपके एक हाथ में बज्र और दूसरे हाथ में ध्वजा रहती है, एवं आपके कंधे पर मूंज का जनेऊ आपकी शोभा बढ़ाता है।

संकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बन्दन।।


अर्थ - हे केसरीनंदन हनुमान! आप भगवान शंकर के अवतार हैं, आपके तेज और प्रताप की पूरे संसार में बंदना की जाती है।

विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।


अर्थ - हे हनुमान! आप जितना विद्यावान, समझदार (गुनी) और चतुर इस संसार में कोई नहीं, और आप अपनी इसी बुद्धि और विद्या का प्रयोग श्री राम के कार्यों में बड़े ही अच्छे ढंग से करते हैं।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।


अर्थ - हे पवनसुत हनुमान! जिस तरह आप श्री राम जी का चरित्र (रामचरितमानस) सुनने के लिए आतुर रहते हैं उसे देख कर लगता है कि आपके तन, मन, बदन हर जगह भगवान राम और माता सीता निवास करती है।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा।।


अर्थ - हे पवनपुत्र हनुमान! इस दुनिया में आपका कोई सानी नहीं है, एक क्षण में अपने छोटा रूप धारण कर माता सीता को दर्शन दिए थे और दूसरे क्षण आपने विकट विकराल रूप धारण कर लंका को जला दिया था।

भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज संवारे।।


अर्थ - हे पवनपुत्र हनुमान! आपने विकराल रूप धारण कर असुरों का संहार किया और रामचंद्र जी के उद्देश्यों को सफल बनाने में उनका साथ दिया।

लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।


अर्थ - आपने सजीवन बूटी लाकर लक्ष्मण को जीवनदान दिया था, उसे देख कर श्री रघुवीर का हृदय आपके प्रति हर्ष से भर गया।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।


अर्थ - हे हनुमंत।। श्री राम आपको इतना पसंद करते हैं कि वे आपकी बढ़ाई करते हुए नहीं थकते हैं, उनको लिए आप अपने भाई भरत की तरह अत्यंत प्रिय हो।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।


अर्थ - हे पवनपुत्र हनुमान।। श्री राम ने आपको यह कह कर गले से लगा लिया कि तुम्हारा सारा बदन दूसरों के जस लिए गुणगान करता है।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा।।


अर्थ - सनकादि, ब्रह्मा, विष्णु, ऋषि-मुनि, नारद एवं समस्त देव सहित आपके तेज यश बल आदि का गुणगान करते हैं।

जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।


अर्थ - हे अंजनीपुत्र हनुमान।। समस्त ब्रह्मांड में आपका यह इतना बड़ा है, कि कोई भी "यमराज, कुबेर, पंडित, विद्वान आदि आपके यश का गुणगान नहीं कर सकता।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।


अर्थ - हे अंजनीपुत्र।। आपने एक उपकार सुग्रीव पर यह किया था, कि उन्हें राम से मिलाया और उनका राजकाज उन्हें वापस मिल सका।

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेस्वर भए सब जग जाना।।


अर्थ - आप के आदेश का पालन विभीषण ने भी किया था, जिसकी वजह से विभीषण लंका का राजा बना था, इस बात को पूरा संसार जानता है।

जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।


अर्थ - हे महावीर हनुमानजो।। सूर्य इस पृथ्वी से लाखों जुग, योजन दूर है जहां तक पहुंचना ही असंभव सा कार्य है, अपने उस सूर्य को एक मीठा फल समझकर निगल लिया था।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।


अर्थ - हे हनुमंतव।।वहआप ही हो जिसने श्री राम की अंगूठी अपने मुंह में रखकर जल संसार को लांघ उस अंगूठी को सीता जी तक पहुंचाया था, और इसमें कोई अचरज की बात नहीं है।

दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।


अर्थ - हे हनुमान। इस संसार में जो भी काम सबसे ज्यादा कठिन है, वह आपकी कृपा से शुभम सरल रूप से हो जाता है।

राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।


अर्थ - हे हनुमान।आप राम को अपना सबसे प्रिय मानते हैं और उनकी रक्षा के हित में उनकी आज्ञा के बिना किसी को भी उन तक नहीं पहुंचने दे सकते हैं।

सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डर ना।।


अर्थ - जो कोई आप की शरण में आता है वह संसार से परे सब सुखों का आनंद उठाता है, जो संसार रूपी सभी सुखों से परे है, और आप जिस की रक्षा कर रहे हैं उसे डरने की कतई आवश्यकता नहीं है।

आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक तें कांपै।।


अर्थ - आपका तेज और आप की गति इतनी हैं कि उसे आप ही संभाल सकते हैं, अन्यथा आपके तेज की गर्जना से तीनों लोक कांप जाते हैं।

भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।


अर्थ - हे महावीर हनुमान।जब कोई व्यक्ति आपका नाम सुमिरन करता है, तब भूत पिशाच एवं दुष्ट आत्मा आपके आसपास भी नहीं भटक सकती है।

नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।।


अर्थ -
 हे हनुमंतजो। मनुष्य आपके नाम का निरंतर जप करता है, उसके सभी रोग, दर्द एवं सभी प्रकार की परेशानियों का निवारण हो जाता है।

संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।


अर्थ - हे हनुमानजो। मनुष्य अपने कार्य, मन, वचन आदि में आपका ध्यान करता है, उसकी सभी परेशानियों का निवारण आप स्वयं करते हैं।

सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा।।


अर्थ - इस संसार में तपस्वी राजा रामचंद्र जी सबसे श्रेष्ठ माने जाते हैं, उनके सभी कामों को आपने सहज सरल किया है।

और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै।।


अर्थ - जो मनुष्य आपको सच्चे भाव से याद करता है, आप उस पर ऐसी कृपा करते हैं, जो उसके जीवन में सबसे महत्वपूर्ण होती है।

चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।


अर्थ - इस संसार में चार युग हैं "सतयुग, त्रेता, द्वापुर, कलयुग" और इन सभी युग में आपकी यश कीर्ति विद्यमान है, और इस संसार में आपका यश सर्वत्र विशेष है।

साधु-संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।।


अर्थ - हे हनुमान! आप श्री राम के प्रिय सज्जनों की हमेशा रक्षा करते हैं, और दुष्टों का हमेशा नाश करते हैं।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।।


अर्थ - हे हनुमंत। आपकी सेवा भावना से श्री जानकी माता ने प्रसन्न होकर आपको वरदान दिया है, उस वरदान के तहत आप किसी अपने प्रिय को आठ सिद्धियां और नौ निधियों का मालिक बना सकते हैं।

राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।।


अर्थ - हे हनुमान। आप श्री राम की भक्ति में इतने मग्न है कि अब राम नाम आपके लिए औषधि बन चुका है, आपको बुढ़ापा एवं अन्य बीमारियां छू भी नहीं सकती जब तक आप भगवान राम की शरण में हैं।

तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम-जनम के दुख बिसरावै।।


अर्थ - हे   पवनपुत्र।।जोष्य आपकी भक्ति करता है, उसके कई जन्मों के दुख दूर हो जाते हैं और वह मनुष्य श्री राम का प्रिय बन जाता है।

अन्तकाल रघुबर पुर जाई।
जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।।


अर्थ - हे बजरंगबली।।दि जीवन मरण के फेर में बंधे हुए होते तो अंत समय आप श्री रामधाम अयोध्या में जाते और फिर से जन्म लेकर श्री राम भक्ति कहलाते।

और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।


अर्थ - हे हनुमंत! यदि कोई मनुष्य आपकी आराधना करता है तो उसे सब सुख प्राप्त होते हैं, एवं उसे किसी अन्य देव की आवश्यकता नहीं रह जाती है।

संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।


अर्थ - जो मनुष्य हनुमान जी का ध्यान करता है एवं उनकी आराधना करता है, हनुमान जी उसके सब दुख संकट दूर करते हैं।

जै जै जै हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।


अर्थ - हे हनुमान।। मैं आपकी जय जयकार करता हूं, कृपया आप मुझ पर अपनी कृपा एक गुरु की भांति बनाए रखें।

जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई।।


अर्थ - जो मनुष्य हनुमान चालीसा का 100 बार पाठ करेगा, वह मनुष्य संसार रूपी बंधनों से छूटकर भगवान के परमानंद की प्राप्ति करेगा।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।


अर्थ - जो मनुष्य नियमित रूप से हनुमान चालीसा का  पाठ करेगा, वह व्यक्ति अपने जीवन काल में नई उपलब्धियां हासिल करेगा और हर काम में सफलता पाएगा। इस बात के साक्षी स्वयं भगवान शंकर है।

तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।।


अर्थ - हे पवनपुत्र हनुमानतु।।लसीदास हमेशा से श्री राम के भक्त रहे हैं, कृपया आप उनके हृदय में निवास करें, जिससे उनका उद्धार हो सके।

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।


अर्थ - हे पवनपुत्र हनुमान।।आप संकटों को हरने वाले और शुभ कार्यों के प्रतीक हैं, मैं तुच्छ व्यक्ति आपसे विनती करता हूं कि आप राम लखन सीता सहित      मेरे हृदय में सर्वदा 

 वास करो।।
                       //    जय श्रीराम     //
     


Wednesday, July 10, 2019

         

                              ////  शब्द ज्ञान।   ////

   * कहते हैं शब्दों के दांत नहीं होते।
लेकिन शब्द जब काटते  है तो दर्द बहुत होता है
 और कभी कभी घाव इतने गहरे होते हैं कि 
जीवन समाप्त हो जाए पर घाव नहीं।।।

*"शब्द" शब्द  सब कोई कहे
          शब्द के हाथ पांव।
                          एक शब्द ओषधि करे 
                           और एक शब्द सौ घाव।।
     

                                 # सुविचार #

  # जैसे ही आप सीखना बंद करते हैं
      आपकी गिनती बुजुर्गों में होने लगती है।।

दुनिया में सबसे पहले कोन आया !! मनु?

           # दुनिया में सबसे पहले कोन आया?               *   नमस्कार दोस्तों क्या आप जानते हैं कि दुनिया में सबसे पहले कों आय...